दक्षिण भारत की संस्कृति और धार्मिक महत्व के संदर्भ में, कावेरी नदी को ‘दक्षिण की गंगा’ के नाम से जाना जाता है। यह दक्षिण भारत की एक प्रमुख नदी है, जो कर्नाटका से निकलकर तमिलनाडु होते हुए बंगाल की खाड़ी में गिरती है। कावेरी नदी का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व बहुत अधिक है, और इसे दक्षिण भारत के लोगों के लिए जीवनदायिनी माना जाता है, जैसे गंगा नदी को उत्तर भारत में पूजा जाता है।
कावेरी नदी का धार्मिक महत्व भी बहुत गहरा है। इस नदी के किनारे कई प्राचीन और प्रसिद्ध मंदिर स्थित हैं, जैसे तिरुचिरापल्ली का श्रीरंगम मंदिर और शिवगंगा का मंदिर। कावेरी नदी के पानी को पवित्र माना जाता है, और इसके स्नान से पापों का नाश होने की मान्यता है। इसके साथ ही, कावेरी नदी पर होने वाले धार्मिक त्योहारों और पूजा-अर्चना में भी इस नदी का विशेष स्थान है।
कावेरी नदी अपने प्राकृतिक सौंदर्य और पर्यावरणीय महत्व के लिए भी प्रसिद्ध है। इसके किनारे हरे-भरे खेत, सुंदर जलप्रपात और विविध वनस्पति का दृश्य देखने को मिलता है। कावेरी नदी के पानी से ही दक्षिण भारत के कई इलाकों में कृषि होती है, जिससे यह क्षेत्र समृद्ध रहता है। इसलिए, कावेरी नदी को ‘दक्षिण की गंगा’ के नाम से पुकारा जाता है, क्योंकि यह नदी न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है बल्कि जीवनदायिनी भी है।
उत्तर: गोदावरी नदी को ‘दक्षिण की गंगा’ कहा जाता है क्योंकि यह दक्षिण भारत की प्रमुख और पवित्र नदी है, जिसकी धार्मिक, सांस्कृतिक, और आर्थिक महत्वता गंगा नदी की तरह ही है।
उत्तर: गोदावरी नदी का उद्गम महाराष्ट्र के नासिक जिले के त्र्यंबकेश्वर से होता है।
उत्तर: गोदावरी नदी की कुल लंबाई लगभग 1,465 किलोमीटर है।
उत्तर: प्रमुख तीर्थ स्थलों में त्र्यंबकेश्वर, पापनाशम, और राजमंडरी शामिल हैं।
उत्तर: गोदावरी नदी को पवित्र माना जाता है और इसके जल को धार्मिक अनुष्ठानों में उपयोग किया जाता है। नदी के किनारे स्थित मंदिर और तीर्थ स्थल श्रद्धालुओं के लिए महत्वपूर्ण हैं।